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"लोकतंत्र के लुटेरे"

"लोकतंत्र के लुटेरे"

अभी हाँल ही में हुए महाराष्ट्र के नगर निगमों तथा जिला पंचायतो के चुनाव में जिन EVM मशीनों का उपयोग किया गया उसमें छेड़छाड़ कर धंधाली करने का आरोप हर जगह से होते नजर आ रहे हैं।

tv9 ने भी किस तरह चुनाव में इस्तेमाल होने वाले इवीएम मशीन में किसी एक दल को ओट न देने के बावजूद भी अन्य दल को ओट किस तरह जाता है यह दिखाया है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 326 के अनुसार हर प्रौढ भारतीय व्यक्ति ओट का अधिकार रखता है। यह ओट वह गोपनीयता से देता है। परंतु उसको पता होता है कि मै किसको ओट दे रहा हूँ। इसके लिए पहले बैलेंट पेपर का उपयोग होता था।

परंतु आज मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। जिसमें एक प्रोग्राम रहता है, जिसे आसानी से बदला भी जा सकता है। इसकी विश्वसनीयता नही दी जा सकती हैं। परंतु बैलेट पेपर की विश्वसनीयता 100% होती थी। मात्र चुनाव के उलझान / रिजल्टस जल्दी एवं कम मेहनत में तथा कम समय में मिलने हेतु इसका उपयोग हमारे लोकतंत्र का मुल आधार चुनावो के लिए किया जाने लगा। लेकिन सफेद कपड़े में बैठे (राजनितिक दलाल एवं चोर) लोगों ने मशिन के प्रोग्राम बनाने वालों के साथ साठ- गाँठ कर मुख्य प्रोग्राम को ही बदल दिया और सामान्य जनता ने दान में दिए हुए ओट को चुरा / लुट कर किसी एक विशिष्ट दल के खाते में जमा कर दिया जा रहा हैं। जिसके फलस्वरूप "A" के कुछ प्रतिशत ओट भी "B"को ही जा रहे हैं, "C" के भी कुछ प्रतिशत ओट" B "को ही जा रहे हैं। इस तरह हर दल के कम- जादा प्रतिशत ओट "B" के खाते में जमा होकर गिरने वाला "B", ओटों की लूट / चोरी मशिन में गड़बड़ी एवं धांधली कर चुनकर आता है। ( लोकतंत्र का सबसे बड़ा मजाक बनाया इन लोकतंत्र के गद्दारोने एवं देश द्रोहीयोने)

ऐसा करने वाले लोकतंत्र के लुटेरे / चोर नही है तो और क्या??

ऐसा कर यह लोग भारत के लोकतंत्र को कमजोर नहीं कर रहे हैं क्या???

लोकतंत्र का मुल आधार "ओट/ मत " की चोरी करना देश के लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी / गद्दारी नहीं है क्या???

लोगों के ओट देने के संवैधानिक अधिकार के साथ एक प्रकार से छल और कपट करने जैसा नहीं है क्या??

लोगों के संवैधानिक ओट देने के अधिकार को नकारने जैसा नहीं है क्या???

अब इस देश की वह जनता, जो बहुत ही ईमानदारी से कडे धूप में लाईन में खडे होकर अपना संवैधानिक ओट देने का अधिकार को बजाती हैं। वह माननीय भारतीय निर्वाचन आयोग से जानना चाहती हैं कि, हमारे " ओट " ऐसे लूटने / चोरी करने क्यों दिया जा रहा है ??

फिर हम संवैधानिक भारतीय निर्वाचन आयोग पर कैसे विश्वास करें????

अब हम सब भारतीय पहले के ही बैलेट पेपर पर मुहर / ठप्पा लगाना चाहते हैं, क्योंकि की हमारा ओट कोई चोरी अथवा छल कपट से चुरा न सके। जैसे वर्तमान में EVM मशिन में से हमारे ओट की लूट / चोरी हो रही है।

देश के मजबूत रिपब्लिक / लोकतंत्र के लिए हमारे ओट / मत का मूल्यांकन हमने जिसे ओट / मत दिया है उसी को ही मिलना चाहिए, ना की किसी लुटेरे को।

बाबासाहेब डॉ अम्बेडकरजी ने बहुत ही मेहनत से यह संवैधानिक ओट/ मत देने का अधिकार हम सभी भारतियों को दिया है। इसलिए हर राजनीतिक दल देश की आवाम को ओट / मत का पवित्र दान हाथ जोड़कर एवं पाँव पढकर माँगते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो अपने बल तथा धन का उपयोग कर निर्धन एवं गरीब, दबे - कुछले तपके के लोगो को पैसे देकर अथवा डरा - धमका कर ओट / मत पाना चाहते हैं। ऐसे लोगों से भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए तथा हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए निष्पक्ष चुनाव होना बहुत ही जरूरी है।

इसलिए अब हम बैलेंट पेपर के उपर ही हमारा ओट / मत अंकित करेेंगे।

समताधिष्ठीत भारत, रिपब्लिक भारत।
जय भीम, जय भारत।

जे पी।

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